God Bless You Meaning in Hindi | गॉड ब्लेस यू का हिन्दी में मतलब

अन्य भाषाओं में भी गॉड ब्लेस यू का मिनिंग (God bless you meaning)
अन्य भाषाओं में भी गॉड ब्लेस यू का मिनिंग (God bless you meaning)

गॉड ब्लेस यू का हिन्दी में मतलब | God Bless You Meaning in Hindi

God Bless You Meaning in Hindi (गॉड ब्लेस यू का हिन्दी में अर्थ) आज इस Article में हम आपको ‘God Bless You’ अंग्रेजी सेंटेंस का अर्थ बताने की कोशिश करेंगे। God bless you meaning in Hindi (गॉड ब्लेस यू का हिंदी में अर्थ क्या होता है?)

God bless you ( गॉड ब्लेस यू ) का साधारण तौर पर हिंदी अर्थ होता है :-

  • ईश्वर आपका भला करें। Ishwar aapka bhala karen.
  • ईश्वर आपके साथ है। Ishwar aapke sath hai.

Meaning of god bless you in some Indian languages. (गॉड ब्लेस यू का अर्थ कुछ भारतीय भाषाओं में)

god bless you meaning
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अब हम यहां पर कुछ अन्य भाषाओं में भी गॉड ब्लेस यू का मिनिंग (God bless you meaning) ही देखते हैं

  • God bless you meaning in Bengali :- ঈশ্বর তোমার মঙ্গল করুক. | Īśbara tōmāra maṅgala karuka
  • God bless you meaning in Gujarati :- ભગવાન તારુ ભલુ કરે | Bhagavāna tāru bhalu karē
  • God bless you meaning in Punjabi :- ਭਗਵਾਨ ਤੁਹਾਡਾ ਭਲਾ ਕਰੇ | Bhagavāna tuhāḍā bhalā karē
  • God bless you meaning in Marathi :- देव तुमचे कल्याण करो | Dēva tumacē kalyāṇa karō
  • God bless you meaning in Nepali :- भगवानले तपाईंलाई आशीर्वाद दिनुहुन्छ | Bhagavānalē tapā’īnlā’ī āśīrvāda dinuhuncha
  • God bless you meaning in Tamil :- கடவுள் உன்னை ஆசிர்வதிக்கட்டும். | Kaṭavuḷ uṉṉai ācirvatikkaṭṭum
  • God bless you meaning in TELUGU :- దేవుడు నిన్ను దీవించును. | Dēvuḍu ninnu dīvin̄cunu
God Bless You Meaning in Hindi | गॉड ब्लेस यू का हिन्दी में मतलब
God Bless You Meaning in Hindi | गॉड ब्लेस यू का हिन्दी में मतलब

अब हम यहां पर पहले यह देख लेते हैं God’s meaning (गॉड का मीनिंग) क्या होता है।

GOD :- भगवान, ईश्वर, परमात्मा, परमेश्वर, सुर, देवता, देव, खुदा, रब, अल्लाह, पूजनीय योग्य, कुदरत, प्रकृति, नियंता, प्रभु

God bless you Wish (गॉड ब्लेस यू विश )

  • ईश्वर आपको आशीर्वाद दें। (Ishwar AapKo Aashirwad de.)
  • परमेश्वर आपका भला करें। (Prameshwar aapka bhala karen.)
  • ईश्वर आप पर हमेशा कृपा-दृष्टि बनाए रखें। (Ishwar aap per kripa-drishti banae rakhen.)
  • God bless you my child. (ईश्वर तुमहरा भला करें, मेरे बच्चे।) Ishwar tumhara bhala kare mere bacche.
  • Good bless you all. (ईश्वर आप सबका भला करें।) Ishwar sap sabka bhala karen.
  • God bless you and give you a new life. (ईश्वर आपका भला करे और आपको एक नई जिंदगी दे।) Ishwar aapka bhala karen or aapko ek nai zindagi de.)
  • May god bless you! (परमेश्वर करे आपका भला हो!) Parmeshwar kare aapka bhala ho.
  • May god bless you with a long life! (ईश्वर आपको लंबी जिंदगी दे।) Ishwar aapko lambi jindagi de.
  • God bless you both. (ईश्वर तुम दोनों का भला करें।) Ishwar Tum donon ka Bhala kare.
  • God bless you and your family. (ईश्वर तुम्हारा और तुम्हारे परिवार का भला करें।) Ishwar tumhara aur tumhare Parivar ka Bhala Karen.
God bless you Wish (गॉड ब्लेस यू विश )
God bless you Wish (गॉड ब्लेस यू विश )

God bless you Quotes (गॉड ब्लेस यू कोट्स)

ईश्वर मानव की स्वाधीनता छीनना नहीं चाहते, इसलिए मानव जब तक स्वयं अपनी ओर से ईश्वर के सम्मुख नहीं होता, तब तक ईश्वर उसके पीछे ही रहते है।

Ishwar Manav ki swadhinta chhinna nahin chahte isiliye Manav jab tak swayam apni aur se Ishwar ke samukh nahin hota tab tak Ishwar uske piche hi rahte hain.

भगवान का अवतार अपनी रसमयी लीला के द्वारा भक्तों को रस प्रदान करने के लिए और स्वयं उनके प्रेम का रस लेने के लिए ही होता है।

Bhagwan ka Avatar apni ras mein Leela ke dwara bhakton ko ras pradan karne ke liye swayam unke Prem Ka ras lene ke liye hi hota hai.

देव की करनी कोई नहीं बदल सकता। विधाता के रचना-विधान को कौन बदल सकता है।

Dev ki karni koi nahin Badal Sakta vidhata ke Rachna Vidhan ko Kaun Badal sakta hai.

देवता न काठ में है, न पत्थर में है, न मिट्टी की मूर्ति में है, देवता भाव में होता है, अत: भाव ही सबका कारण है।

Devta na kat me hai, na pathar me hai, na mitti mein hai, Devta bhav mein hai, atah bhav hi sabka Karan hai

पवित्र मार्ग के प्रदर्शक देवता गण पाप मार्ग का अनुसरण नहीं करते।

Pavitra Marg ke pradarshak Devta gan baap Marg ka anusaran nahin karte.

महाप्रसाद समझकर स्वानन्द से भोग लगावे।

Mahaprasad samajhkar Swanand se bhog lagave.

दारा, सुत, गृह, प्राण सब भगवान को अर्पण कर देना चाहिए। यह पूर्ण भागवत धर्म है। मुख्यत: इसी का नाम भजन है।

Dara, Sut, grah, Pran sab Bhagwan ko Arpan kar dena chahie. Yah purn Bhagwat Dharm hai mukhyatah isi Ka Naam bhajan hai.

साधु-सन्तों से मैत्री करो, सबसे पुराना परिचय (प्रेम) रखो, सबके श्रेष्ठ सखा बनो, सबके साथ समान रहो।

Sadhu santon se Maitri karo, sabse purana Parichay (Prem) rakho, sab ke shreshth Sakha Bano, sabke sath Samman raho.

भगवान् की आचार सहित भक्ति सब योगों का योग गह्वर, वेदान्त का निज भण्डार, सकल सिद्धियों का परम सार है।

Bhagwan ki aachaar sahit bhakti sab logon ka yog gahvar, Vedant Bhandar siddhiyon ka Param sar.

गृहस्था श्रम में रहकर भी जिसका चित्त प्रभु के रंग में रंग गया और इस कारण जिसकी गृहासक्ति छूट गयी, उसे गृहस्थाश्रम में भी भगवत्प्राप्ति होती है और निज बोध में ही सारी सुख-सम्पत्ति मिल जाती है।

Grast aashram mein rahakar bhi jiska chit Prabhu ke rang mein rang Gaya aur is Karan jiski grahaakti chhut gai use grast aashram mein bhi Bhagwat prapti hoti hai aur nij God mein hi sari Sukh sampatti mil jaati hai.

जीव और परमात्मा दोनों एक हैं। इस बात को जान लेना ही ज्ञान है। वह ऐक्य लाभ कर परमात्मा सुख भोगना सम्यक् विज्ञान है।

Jeev aur Parmatma donon ek hai is baat Ko Jaan Lena hi Gyan hai. Ekya Labh Parmatma Sukh bhogna samyak vigyan hai.

God bless you motivational Quotes (गॉड ब्लेस यू motivational कोट्स)

मैं ही देव हूं, मैं ही भक्त हूं, पूजा की सामग्री भी मैं ही हूं, में ही अपनी पूजा करता हूं। यह अभेद उपासना का एक रूप है।

Main hi Dev hun, main hi bhakt hun, Puja ki samagri bhi main Hun, main hi apni Puja karta hun. yah aadesh upasna ka ek roop hai.

हम परमात्मा से कभी अलग हुए नहीं, हो सकते नहीं और शरीर से हमारा मिलन हुआ नहीं, हो सकता नहीं।

Ham Parmatma se kabhi alag hue hi nahin, ho sakte nahin aur sharir se hamara Milan hua nahin, ho sakta nahi.

जो बलपूर्वक शासन करे, उसे ईश्वर नहीं कहते । ईश्वर किसी पर भी बलपूर्वक शासन नहीं करता ।

Jo Pal purv shasan Karen use Ishwar nahin kahate, Ishwar kisi per bhi Bal purak shasan nahin karta.

आप ऐसा मत सोचिए कि ईश्वर ऐसा ईश्वर है कि जो उसको मानता है, उसका तो दु:ख नाश करता है और जो उसको नहीं मानता, उसका दु:ख नाश नहीं करता है।

Aap Aisa mat sochiye ki Ishwar aisa hai ki jo usko manta hai uska to dukh Nash karta hai aur jo use nahin manta uska dukhna nahin karta.

उनके देने का ढंग कितना अलौकिक है कि जिसे जो देते हैं, उसे वह अपना ही मालूम होता है। क्या उनकी उदारता का यह उपयोग किया जाए कि हम सुने हुए प्रभु में आस्था नहीं करेंगे ? जाना हुआ तुम्हारे काम आया नहीं, सुने हुए में आस्था की नहीं और अकेले अपने में ही सन्तुष्ट रह पाते नहीं। तो ऐसी दशा में जो दुर्गति होती है, क्या किसी से छिपी है ?

Uske dene ka dhang Kitna alaukik hai ki use jo deta hai, use vah apna hi maloom hota hai. kya uski udarta ka yah upyog kiya jaaye ki ham sunte hue Prabhu main Aastha nahin karenge Jana hoga tumhare Kam nahin aaya sune hue main Aastha hi nahin aur akele Apne mein santusht rah paate nahin aisi dasha mein jo durgati hoti hai kya kisi se chhupi hai?

परमात्मा को ‘अभी’ न मानना बड़ी भारी भूल होगी, ‘अपना’ न मानना उससे बड़ी भूल होगी, और ‘अपने में’ न मानना सबसे बड़ी भूल होगी।

Parmatma ko jo abhi na manana badi Bhari bhul hogi. apna na manana usse bhi badi bhul hogi. aur apne me Na manana Sabse badi bhul hogi.

अगर अपनी चाह को मानते हैं तो प्रभु को नहीं मानते, और प्रभु को मानते हैं तो चाह-रहित होना ही पड़ेगा।

Agar apni chah ko mante Hain to Prabhu Ko nahin mante aur Prabhu ko mante Hain to chah rahit hona hi padega.

सहज अनुकम्पा से प्राणियों के साथ अन्न, वस्त्र, दान, मान इत्यादि से प्रिय आचरण करना चाहिए। यही सबका स्वधर्म है।

Sahaj anukanpa se praniyon ke sath Ann, vastra, Dan, man ityadi se Priya aacharan karna chahie yahi sabka swadharm hai.

पिता स्वमेय नारायण हैं, माता प्रत्यक्ष लक्ष्मी हैं। ऐसे भाव से जो भजन करता है, वही सुपुत्र है।

Pita Swmev Narayan hai, Mata pratyaksh Lakshmi he. aise bhav mein jo bhajan karta hai, vahi suputra hai.

बहते जल पर चाहे जितनी रेखाएं खींचे, एक भी रेखा न खिचेगी, वैसे ही सत्व शुद्धि के बिना आत्मज्ञान की एक भी किरण प्रकट न होगी।

Bahte jal per chai kitni rekhaen khinche ek bhi Rekha na khinchegi vaise hi satva shuddhi ke Bina aatmgyan ki ek bhi Kiran prakat na hogi.

धन्य है नरदेह का मिलना, धन्य है साधुओं का सत्संग, धन्य हैं वे भक्त, जो भगवद्भक्ति में रंग गये।

Dhanya hai nardev ka Milana, Dhanya hai Sadhu ka satsang, Dhanya ve bhakt Jo Bhagwat bhakti mein rang Gaye.

भाव न हो, तो साधन का कोई विशेष मूल्य नहीं।

Bhav Na Ho to sadhan ka koi Vishesh mulya nahin.

भूत मात्र में जब हरि के दर्शन होने लगते हैं, तभी निष्काम और सच्ची भूतसेवा बन पड़ती है।

Bhoot Matra mein jab Hari ke darshan hone lagte Hain, tabhi nishkam aur sacchi bhoot seva ban padati hai.

यदि तुम भगवान् को चाहते हो, तो भाव से उनके गीत गाओ। दूसरे के गुण-दोष न सुनो, मन में भी न लाओ। संत के चरणों की सेवा करो। सबके साथ विनम्र रहो और थोड़ा-बहुत जो कुछ बन पड़े, उपकार करो। यह सुलभ उपाय है।

Yadi Tum Bhagwan ko chahte ho to bhav se unke geet Gao. dusre ke gungan na suno, man me bhi na Lao. Sant ke charnon ki seva karo. Sabke sath vinamra raho or thoda bahut jo kuchh ban pade Upkar karo ya Sulabh upay hai.

पर-उपकार से उन्हीं हरि की ही सेवा बनती है। भूतों का उपकार ही भूतात्मा का पूजन-अर्चन है।

Paropkar mein Hari ki seva banti hai. bhuton ka Upkar hai udartama ka Pujan Aarchan hai.

God bless you Quotes (गॉड ब्लेस यू कोट्स)
God bless you Quotes (गॉड ब्लेस यू कोट्स)

God bless you status (गॉड ब्लेस यू स्टेटस)

जो मनुष्य जिस कार्य के भार को अपने ऊपर उठाने का हृदय से प्रयास करता है, उस कार्य में देव उसकी सहायता अवश्य करता है।

Jo manushya jis karya ki bahar ko Apne upar uthane ka hriday se prayas karta hai, use karya mein Dev uski sahayata avashyak karte Hain.

ईश्वर अपने बच्चों के नेत्रों को कभी-कभी आंसुओं से धोता है, ताकि वे उनकी प्रकृति और आदेशों को सही-सही पढ़ सकें।

Ishwar Apne bacchon ke netron ko kabhi-kabhi aansuon se Dhokha hai, taki ve unki pravritti aur aadeshon Ko Sahi padh sake.

ओंकार ही वास्तविक ब्रह्म है, चरम सत्य है।

Onkar hi vastvik bhram hai, shram Satya hai.

एक सत्य स्वरूप परमेश्वर को विद्वान अनेक नामों से पुकारते हैं।

Ek Satya Swaroop parmeshwar ko vidwan anek naamon se pukarte Hain.

ईश्वर के अगणित नाम हैं; क्योंकि उसकी लीलाएं अगणित हैं।

Ishwar ke anginat naam hai, kyunki uski leelayen anginat hai.

ईश्वर ही सर्वज्ञान-सम्पन्न हैं, महान प्रेमी और संकल्प स्वरूप हैं।

Ishwar Ishwar Gyan sampann hai, mahan Premi aur Sankalp Swaroop hai.

प्रत्येक व्यक्ति ही ईश्वर की लघु प्रतिमा मात्र है।

Pratyek vyakti hi Ishwar ki laghu Pratima hai.

ईश्वर ही हमारा आश्रयदाता है और शक्तिदाता है। वही आपात्काल की सबसे बड़ी सहायता है।

Ishwar hi hamara aasray data aur Shakti data hai. vahi aapatkal ki Sabse badi sahayata hai.

ईश्वर उन्हीं की सहायता करता है, जो स्वयं अपनी सहायता करते हैं।

Ishwar unhi ki sahayata karte Hain Jo swayam apni sahayata karte hai.

यदि ईश्वर न भी होता, तो उसका आविष्कार करना हमारे लिए परम अपेक्षित हो जाता।

Yadi Ishwar na bhi hota to uska aavishkar karna hamare liye Param apekshit ho jata.

दृश्य ईश्वर क्या है? गरीब की सेवा।

Drishya Ishwar kya hai? garibon ki seva.

God bless you status in hindi

जिस प्रकार बाघ पशुओं का भक्षण करता है, उसी प्रकार ईश्वर-भक्ति भी मनुष्यों को फंसाने वाले सारे शत्रुओं का भक्षण कर जाती है। लोभ और क्रोध पूर्णत: नष्ट हो जाते हैं।

Jis prakar Bagh pashuon ka bhakshan karta hai, usi prakar Ishwar bhakti bhi manushya ko fansane wale sare shatruon Ka bhakshan kar jaati hai. log aur Krodh purnatah nasht Ho jaate Hain.

स्वयं के सत्य की अथक खोज ही भक्ति है।

Swayam ke Satya ki athak Khoj hi bhakti hai.

एक पवित्र हृदय भक्ति का मन्दिर होता है, वहां साधक त्याग की पवित्र अग्नि प्रज्वलित करता है, जो अदृश्य होती है, किन्तु फिर भी अनुभव योग्य होती है ।

Ek Pavitra hriday bhakti Ka Mandir hota hai, vahan sadhak tyag ki Pavitra Agni prajwalit karta hai, jo adrishya hoti hai kintu fir Bhi Anubhav yogya hoti hai.

God bless you status (गॉड ब्लेस यू स्टेटस)
God bless you status (गॉड ब्लेस यू स्टेटस)   image credits

God bless you Suvichar (गॉड ब्लेस यू सुविचार)

शुद्ध ज्ञान और शुद्ध शक्ति एक ही वस्तु है दोनों साधक को एक ही लक्ष्य पर पहुंचाते हैं। भक्ति का मार्ग अधिक सरल है।

Shuddh Gyan aur shuddh bhakti ek hi vastu hai donon sadhak ko ek hi Lakshya per pahunchate Hain. bhakti Marg adhik saral hai.

प्रभु की महिमा का कोई पारावार नहीं है। उनके सिखाने ढंग हैं। जिसने किसी भी प्रकार एक बार भी उन्हें स्वीकार किया, उसका बेड़ा पार हुआ, ऐसा मेरा विश्वास तथा अनुभव है।

Prabhu ki Mahima ka koi ant nahin. Unke sikhane ka dhang hai. jisne kisi bhi prakar ek bar Bhi unhen swikar Kiya, unka beda paar hua. aisa mera Vishwas tatha Anubhav hai.

प्रभु से भिन्न और कोई न देखने वाला है और न सुनने वाला। वे ही सभी को देख रहे हैं और सभी की सुन रहे हैं। यह उनका सहज स्वभाव है।

Prabhu se bhinn aur koi Na dekhne wala hai aur na sunane wala. Yahi sabhi ko dekh rahe hain aur sabhi ki sun rahe hain ya unka sahaj swabhav hai.

ब्रह्मा के रूप में ईश्वर सृजन करता है, विष्णु के रूप में पालन करता है और शिव के रूप में न्याय करता है।

Brahma ke roop mein Ishwar sarjan karta hai, Vishnu ke roop mein palan karta hai aur Shiv ke roop mein nyaay karta hai.

आखिर ईश्वर क्या है, एक शाश्वत बालक जो एक शाश्वत बाग में शाश्वत खेल खेल रहा है।

Aakhir Ishwar kya hai ek shaswat balak Jo ek shasak bag mein shaswat khel raha hai.

ईश्वर अचल शक्ति है, उसका विश्व कभी अराजक नहीं हो सकता।

Ishwar Aanchal Shakti hai, jiska Vishva ka pyara Jag nahin ho sakta.

परमात्मा उसे नहीं कहते, जो किसी वस्तु-विशेष के द्वारा प्राप्त हो अथवा किसी योग्यता-विशेष के द्वारा प्राप्त हो अथवा किसी सामर्थ्य-विशेष के द्वारा प्राप्त हो। परमात्मा उसे कहते हैं कि जिसकी प्राप्ति विश्वास से होती है।

Parmatma use nahin kahate, Jo kisi vastu Vishesh ke dwara prapt Ho athva kisi yogyata Vishesh dwara prapt Ho athva kisi Samarth Vishesh ke dwara prapt Ho. Parmatma use kahate Hain jiski prapti Vishwas se Hoti hai.

जो अपने ही हैं, भला वे कभी अपने को भूल पाते हैं ! उनमें भूल की गन्ध भी नहीं है। किन्तु उनके दिये हुए सीमित सौन्दर्य को पाकर साधक ही उन्हें भूलता है।

Jo Apne hi hai, Bhala vo kabhi Apne Ko bhul paate Hain unmen bhul ki ganth bhi hoti hai kintu unke diye hue asimit Soundarya ko pakar sadhak hi unhen bhulta hai.

जिसने एक बार भी प्यारे प्रभु को अपना कहा है, उसका सर्वतोमुखी विकास अनिवार्य है।

Jisne ek bar bhi pyare Prabhu ko apna kaha hai, unka sarv to Mukhi Vikas anivarya hai.

वे अपनी वस्तु को सदैव देखते रहते हैं। उन्होंने कभी भी तुम्हें अपनी आँख से ओझल नहीं किया। साधक भले ही उन्हें भूल जाए, पर वे नहीं भूलते। जिसकी जो वस्तुएँ हैं, उसे वह देखता ही है, सँभालता ही है। अपनी रचना से क्या रचयिता अपरिचित होता है ? कदापि नहीं।

Ve apni vastu ko sadaiv dekhte rahte hain. Unhen kabhi bhi tumhen apni aankh se ojhal nahin kiya. Sadar bhale hi unhen bhul jaaye, parve nahin bolate. Jiski Jo vastuen Hain, use bhi dekhtea hi hai, sambhalta hi hai. Apni Rachna se rachaieta aparichit hota hai? kadapi nahin.

साध्य के सम्बन्ध में जिस किसी ने जो कुछ कहा है, वह अधूरा है; अथवा यों कहो कि उतना तो है ही, उससे विलक्षण भी है।

Shaadi ke sambandh mein jis kisi ne Jo kuchh kaha hai, vah adhura hai, athva yon kaho ki utna to hai hi, usse vilakshan bhi hai.

अविनाशी में आस्था तथा उसका बोध न होने पर भी विनाशी का आश्रय त्याग कर प्रत्येक साधक अविनाशी से अभिन्न हो सकता है।

Avinashi mein Aastha tatha uska Bodh na hone per bhi Avinashi ka aasra tyag kar pratyek sadhak Avinashi se bhinn ho jata hai.

ईश्वर ही हमारा आश्रयदाता है और शक्तिदाता भी । वही आपात्काल में हमारी सबसे बड़ी मदद करता है।

Ishwar hi hamara aas rahata hai Shakti data bhi. Vahi aapatkal mein hamari Sabse badi madad karta hai.

यह सब निश्चय रूप से ब्रह्म है, मैं वही (ब्रह्म हूं।

Yah sab nishchit roop se Braham hai, main vahi bhram hun.

परमात्मा सर्वगुणसम्पन्न, सर्वव्यापी और सर्वज्ञाता है।

Parmatma sargunsampann, sarvvyapi asahyogyata hai.

भगवान का सर्वश्रेष्ठ भक्त वह है, जो ब्रह्म को साक्षात्कार देखता है कि भगवान ही समस्त जीव, जगत एवं चौबीस तत्त्व बने हुए हैं।

Bhagwan ka sarvshreshth bhagava hai, Jo Braham ko sakshat dekhta hai ki Bhagwan hi samast jeev Jagat aur 24 tatv Bane hue hain.

God bless you Suvichar (गॉड ब्लेस यू सुविचार)
God bless you Suvichar (गॉड ब्लेस यू सुविचार)

God bless you thoughts (गॉड ब्लेस यू थॉट्स)

जिस प्रकार खली मिला हुआ भूसा गाय को प्रिय होता है और वह उसे लालच के साथ निगलती चली जाती है। उसी प्रकार भगवान को अपने भक्तों से अनन्य प्रेम होता है।

Jis prakar Khali Mila hua bhusa gaay ko Priya hota hai aur vah use laalach ke sath nigalti Chali jaati hai. usi prakar Bhagwan ko Apne bhakton se Ananya Prem hota hai.

यह सत्य है कि भगवान सभी प्राणियों में वास करते हैं, परन्तु भक्त का हृदय भगवान का निवासस्थान होता है।

Yah Satya hai ki bhagwan sabhi praniyon mein bas karte Hain, pradum bhakt ka hriday Bhagwan ka nivas sthan hota hai.

जिस प्रकार हवा से हिलते हुए जल में परछाई नहीं दिखाई देती, उसी प्रकार मन के लिए सिर हुए बिना भगवान के दर्शन नहीं होते।

Jis prakar hawa se hilte hue jal mein parchhai nahin dikhai deti, usi prakar man ke liye sir hue Bina Bhagwan ke darshan nahin hote.

मन में भगवान का रूप ऐसे आकर बैठ जाये कि जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति कोई भी अवस्था याद न आवे ।

Man mein Bhagwan ka Swaroop aise Aakar baith jaaye ki jagrit, swapn, susupti koi bhi avastha yad Na aaye.

इन कानों से तेरा नाम और गुण सुनूंगा। इन पैरों से तीर्थों के ही रास्ते चलूंगा । यह नश्वर देह किस काम आवेगी ?

Ine kanon se Tera Naam aur gungan sunuga. Ine pairon se Tirthon ke raste chalunga. Akhir ya na swar de kis kam aaegi!

भगवन ! मुझ में ऐसी प्रेम भक्ति दे कि मुंह से तेरा ही नाम अखण्ड रूप से लेता रहूं।

Bhagwan ! mujhe mai aisi Shakti bhar de ki munh se Tera Naam akhand roop se leta Hun.

जो दिन-रात श्रीकृष्ण के नामों का कीर्तन नहीं करती, वह जिह्वा नहीं है, वह तो मुख में कोई पापमयी लता है, जिसे जिह्वा के नाम से पुकारा जाता है। जो ‘ श्रीकृष्ण कृष्ण-कृष्ण-श्रीकृष्ण’ इस प्रकार श्रीकृष्ण नाम का कीर्तन नहीं करती, वह रोगरूपिणी जीभ सौ टुकड़े होकर गिर जाये।

Jo din Raat Shri Krishna ke naamon ka kirtan nahin karti vah jivah nahin hai, vah to mukh mein koi paapmai Lata hai, jisse Jivah ke naam se pukara jata hai. Jo Shri Krishna-Krishna-Krishna Shri Krishna is prakar Shri Krishna ka naam kirtan nahin karti vah group mein ji 100 tukde hokar gir jaaye.

भगवान को सभी मनुष्यों के साथ एक समान प्रेम है, लेकिन अधिकतर लोगों का चेतना का धुंधलापन उन्हें इस दिव्य प्रेम को देखने से रोकता है।

Bhagwan Ko sabhi manushya ke sath ek saman Prem hai, lekin adhiktar logon ka Chetna ka dhundhlapan unhen is Divya Prem se dekhne se rokata hai.

ईश्वर कोई बाह्य सत्य नहीं है। वह तो स्वयं के ही परिष्कार की अंतिम चेतनावस्था है। उसे पाने का अर्थ स्वयं वही हो जाने के अतिरिक्त और कुछ नहीं है।

Ishwar koi Bahiya Shakti nahin hai. Vah to swayam ke hi parishkar ki antim Chetna avastha hai. Use pane ka Arth swayam vahi Ho jaane ke atirikt aur kuchh nahin.

क्या ईश्वर है? ईश्वर-ही-ईश्वर है-सभी कुछ वही है, लेकिन जो ‘मैं’ से भरे हैं, वे उसे नहीं जान सकते। उसे जानने की पहली शर्त स्वयं को खोना है।

Kya Ishwar hai? Ishwar hi Ishwar hai – sabhi kuchh vahi hai, lekin jo main se bhare hai, ve use Jaan nahin sakte. use janne ke liye pahli shart swayam Ko khona hai.

अनुकूलता-प्रतिकूलता को मत देखो, जिस प्रभु ने उनको भेजा है, उस प्रभु को देखो और उसी को अपना मानकर प्रसन्न रहो।

Anukulata-pratikulta Ko mat dekho. Jis Prabhu ne unko bheja hai, use Pramukh Ko dekho aur usi ko apna mankar prasann raho.

जिसे ईश्वर की अनुभूति हो जाती है, उसका हृदय दया, करुणा तथा सेवा-भावना से सरोबार हो जाता है।

Jisse Ishwar ki Anubhuti Ho jaati hai uska hriday Daya, Karuna tatha seva Bhavna se sarobar Ho jata hai.

ईश्वर प्रत्येक व्यक्ति को सच और झूठ में एक को चुनने का अवसर देता है।

Ishwar pratyek vyakti ko sach aur jhooth mein ek Ko chunne Ka avsar deta hai.

इस सत्य को धारण करो कि भगवान न पराये हैं, न तुमसे दूर हैं और न ही दुर्लभ हैं।

Is Satya ko dharan karo ki Bhagwan na paraaye hain, na tumse dur hai aur na hi durlabh hai.

ईश्वर कण-कण में है, वह सर्वव्यापी है। इस कथन का आशय सिर्फ इतना है कि आप ईश्वर को हमेशा मौजूद मानें।

Ishwar Kan-Kan mein hai, vah vyapi hai. Is kathan ka aashay sirf itna hai ki aap Ishwar ko hamesha maujud Mane.

परमात्मा व्यक्ति नहीं है, उसका साक्षात्कार नहीं हो सकता। परमात्मा शक्ति है लेकिन शक्ति भी पदार्थगत नहीं है, आत्मगत है, इसलिये उसका पहला अनुभव स्वयं में प्रवेश पर ही होता है।

Parmatma vyakti nahin hai, uska sakshatkar nahin ho sakta. Parmatma Shakti hai lekin Shakti bhi padarthgat nahin hai, atmagat hai, isiliye uska pahla Anubhav swayam mein Pravesh per hi hota hai.

जीव ईश्वर का अंश है।

Jiv Ishwar ka ansh hai.

तुम्हारे बल पर मन वश में नहीं होगा, भगवान के बल पर विश्वास करो और चुपचाप उनको याद करते रहो।

Tumhare Bal per man Vash mein nahin hoga, Bhagwan ke bal per Vishwas karo aur chupchap usko yad karte raho

भगवान की याद से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है और उनको भूल जाने से बढ़कर कोई पाप नहीं है।

Bhagwan ki yad se badhkar koi punya nahin aur usko bhul jaane se badhkar koi paap nahin.

पाप का फल जो करने वाले को होता है, वही प्रायः उनको प्रकट करने वाले को होता है, इसलिए दूसरे के पापों को प्रकट न करो।

Aapka Jo fal karne Wale Ko hota hai, vahi price unko prakat karne walon Ko hota hai, isiliye dusre ke Papa Ko prakat Na Karo.

जो पाप प्रकट हो जाते हैं, वे बदनामी देकर नष्ट हो जाते हैं, इसलिए हिम्मत करके अपने पापों को प्रकट कर दो और बदनामी को सिर चढ़ाकर सुखी हो जाओ।

Jo paap prakat Ho jaate Hain, ve badnami dekh kar nasht ho jaate Hain, isiliye himmat karke Apne papa ko prakat kar do aur badnami aur sirf chadhakar sukhi ho jao.

भरज होता है गरज से। इसमें प्रारब्ध वाला मूर्ख है।

Braj hota hai garaj se. ismein prarabdh wala murkh hai.

भजन न करके जो विषयों में वैराग्य चाहता है, वह बड़े धोखे में है। भजन करो, तो विषयों में वैराग्य आप ही खत्म हो जाएगा।

Bhajan na karke Jo vishayon mein vairag ke chahta hai, vah bade dhokhe mein hai. Bhajan Karo, bhavishya mein vairagya aap hi khatm ho jaega.

भगवान के प्रेमी की यह पहचान है कि वह भगवान के लिए सदा व्याकुल रहता है।

Bhagwan ke Premi ki yah pahchan hai ki vah Bhagwan ke liye sadabayakul rahata hai.

विरह-ताप से जब तक हृदय नहीं जलने लगता, तब तक भगवान की मुख-माधुरी के दर्शन नहीं होते।

Birha tap se jab hriday Tak nahin jalne lagta tab tak Bhagwan ki mukh Madhuri ke darshan nahin hote.

जैसे भूखा अन्न के लिए और प्यासा जल के लिए तरसता रहता है, उससे भी अधिक ताप तुम्हारे हृदय में भगवान के लिए चाहिए।

Jaise bhukha ann ke liye aur pyasa jal ke liye tarasta hai, usse bhi adhik tap tumhare hriday mein Bhagwan ke liye chahie.

सच्चा गुरु वही है, जो भगवान की प्राप्ति करवा दे। शिष्य को चाहिए कि वह गुरु की आज्ञा का पालन करे, केवल गुरु मात्र से काम नहीं चलता।

Saccha Guru vahi hai, jo Bhagwan ki prapti karva de. Shishya ko chahie ki vah Guru ki aagya ka palan Karen, Keval Guru Matra se Kam nahin chalta.

भगवान को छोड़कर केवल दैवी गुणों से मोक्ष की आशा रखना बच्चों की-सी व्यर्थ चेष्टा है।

Bhagwan ko chhodkar Keval Devi gunon se moksh ki asha rakhna bacchon ki si chesta hai.

सत्य आदि सद्गुणों के ठहराने के लिए भगवद्विश्वास रूपी आधार की अत्यन्त आवश्यकता है।

Satya gunon ke thaharne ke liye BhagwatVishwas rupi Aadhar ki adhyayan avashyakta hai.

रात-रात भर प्रार्थना की अपेक्षा एक घंटा भी दूसरों को ज्ञान देने में खर्च करना अधिक अच्छा है।

Raat-Raat bhar prathna ki apeksha ek ghanta bhi dusron ko Gyan dene mein kharch karna adhik achcha hai.

God bless you thoughts (गॉड ब्लेस यू थॉट्स)
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God bless you motivational quotes (गॉड ब्लेस यू मोटिवेशनल कोट्स)

पवित्र हृदय से निकली हुई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती।

Pavitra hriday se nikali Hui prathna kabhi vyarth nahin.

बारिश का परिणाम हृदय के द्वारा आत्मा पर होता है।

Barish Ka parinaam hriday ke dwara Atma per hota hai.

विपत्ति से मेरी रक्षा करो-यही मेरी प्रार्थना नहीं है। मैं विपत्ति से डरूँ नहीं, यही प्रार्थना है। मैं दु:ख को जीत सकूँ, मेरा अपना बल न टूटे, बस यही प्रार्थना है।

Vipatti mein meri raksha karo yahi meri prathna hai. Main bhi Pati se Darun nahin yahi meri prathna hai. Main dukh ko Jeet sakun, Mera apna Bal Na tute, bus yahi prathna hai.

जब मन और वाणी एक होकर कोई चीज माँगते हैं, तब उस प्रार्थना का फल अवश्य मिलता है।

Jab man aur Vani ek hokar koi chij mangte Hain, tab use prathna ka fal avashya milta hai.

प्रार्थना करने वाले हाथ से कर्म का हाथ श्रेष्ठ है।

Prathna karne Wale hath se karm ka hath shreshth hai.

अपने दुर्गुणों का चिन्तन और परमात्मा के उपकारों का स्मरण यही सच्ची प्रार्थना है।

Apne durgunon ka Chintan aur Parmatma ke upkaron ka smaran yahi sacchi prathna hai.

हमारी प्रार्थना सर्व-सामान्य भलाई के लिए होनी चाहिए, क्योंकि ईश्वर जानता है कि अच्छा क्या है।

Hamari prathna sarv samanya bhalai ke liye honi chahie, kyunki Ishwar jaanta hai ki achcha kya hai.

प्रार्थना द्वारा ईश्वर की कृपा और सहायता से हम अपनी कमजोरियों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।

Prathna dwara Ishwar ki kripa aur sahayata se ham apni kamjoriyon per Vijay prapt kar sakte hain.

God bless you motivational quotes in hindi

 

यदि हमें प्रार्थना का उत्तर न मिले तो समझ लो कि ईश्वर से माँगने की विधि में कहीं-न-कहीं भूल हो रही है।

Yadi hamen prathna ka Uttar Na mile to samajh lena ki Ishwar se manne ki vidhi main kahin na kahin bhul ho rahi hai.

प्रार्थना जीभ से नहीं हृदय से होती है। इसी से गूंगे, तोतले और मूढ़ भी प्रार्थना कर सकते हैं। प्रार्थना आत्मा की खुराक है।

Prathna Ajeeb se nahin Hoti hriday se Hoti hai. isiliye gunge totle mood bhi prathna kar sakte hain. prathna Atma ki khurak hai.

असफलता भगवान में नहीं हममे है।

Asafalta Bhagwan mein nahin hamme hain.

जो देवताओं की बातें सुनते हैं, देवता उनकी बातें सुनते हैं।

Jo devtaon ki baten sunte Hain, Devta unki baten sunte Hain.

मनुष्य को चाहिए कि वह अपना काम देखे, दूसरों के कामों की नुकताचीनी न करे।

Manushya ko chahe ki vah apna Kam dekhen, dusron ke kamon ki nuktachini na Karen.

जो दूसरों के कामों की आलोचना में ही लगे रहते हैं, वे अपना समय तो व्यर्थ खोते ही हैं, दोष देखने की उनकी आदत बन जाती है और जिनको दूसरों में दोष ही दीखते हैं, उनके हृदय की जलन कभी मिट ही नहीं सकती।

Jo dusron ke kamon ki aalochana mein hi Lage rahte hain, ve apna samay to vyarth khote hi hain, dost dekhne ki unki aadat ban jaati hai aur jinko dusron ke dosh hi dikhte hain, unke hriday ki jalan kabhi meet hi nahin sakti.

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नम्रता के तीन लक्षण हैं-१. कड़वी बात का मीठा जवाब देना, २. क्रोध के अवसर पर भी चुप्पी साधना और ३. किसी को दण्ड देना ही पड़े, तो उस समय चित्त को कम रखना।

Namrta mein teen gun hai – 1. kadvi baat ka meetha jawab dena, 2. Krodh ke avsar per bhi chupi Sadhna 3. Kisi Ko dand Dena hi pade, to use samay chit ko kam rakhna.

अपनी स्तुति और दूसरों की निन्दा, हे गोविन्द ! मैं कभी न करूं। सब प्राणियों में हे राम! मैं तुम्हें ही देखूं और तेरे प्रसाद से ही सन्तुष्ट रहूं ।

Apne Stuti aur dusron ki ninda, he Govind ! Main kabhi na karun. Sab praniyon mein he Ram ! Main tumhen hi dekhun aur tere Prasad se hi santusht rahun.

भगवान का आवाहन किया, पर इस आवाहन में विसर्जन का कुछ काम नहीं। जब चित्त उसी में लीन होता है, तो गाते भी नहीं बनता।

Bhagwan ka aavahan Kiya, per is aavahan mein visarjan ka kuchh Kam nahin. Jab chit usi mein leen hota hai to gate bhi nahin Banta.

जो सब देवों का पिता है, उसके चरणों की शरण लेते ही सारी माया छूट जाती है, सब द्वन्द्व नष्ट हो जाते हैं।

Jo sab Devon Ka pita hai, uske charanon ki Sharan lete hi Sari Maya chhut jaati hai sab dvand nasht Ho jaate Hain.

वह ज्ञानद्वीप जलाया, जिसमें चिन्ता का कोई काजल नहीं और आनन्द भरित प्रेम से देवाधिदेव श्रीहरि की आरती की। सब भेद और विकार उड़ गये।

Vah gyandeep jalaya jismein chinta ka koi Kajal nahin aur Anand bharate Prem se devaadhidev Shri Hari ki aarti sab ved aur vikar ud Gaye.

भीतर – बाहर, चर-अचर में सर्वत्र श्रीहरि ही विराज रहे हैं। उन्होंने मेरा मन हर लिया, मेरा-तेरा भाव निकाल दिया।

Bhitar-bahar, char-Achar mein sarvatra Shri Hari hi Viraj rahe hain. Unhone Mera man har liya, Mera-Tera bhav nikal Diya.

योग, तप, कर्म और ज्ञान – ये सब भगवान के लिए हैं। भगवान के बिना इनका कुछ भी मूल्य नहीं है।

Yog, tap, karm or gyan – yah sab Bhagwan ke liye hai. Bhagwan ke bina Inka kuchh Bhi mulya nahin.

भगवान के चरणों में संसार को समर्पित करके भक्त निश्चिन्त रहते हैं और तब वह सारा प्रपञ्च भगवान का ही हो जाता है।

Bhagwan ke charanon mein sansar ko samarpit karke bhakt nishchit rahte hain aur tab vah Sara prapanch Bhagwan ka ho jata hai.

गंगा सागर से मिलने जाती है, परन्तु जाती हुई जगत का पाप-ताप निवारण करती है। उसी प्रकार आत्मस्वरूप को प्राप्त जो संत हैं, वे अपने सहज कर्मों से संसार में बंधे बन्दियों को छुड़ाते हैं।

Gangasagar mein milane jaati hai, parantu jaati Hui Jagat ka paap-tap nivaaran karti hai. Usi prakar Atma Swaroop ko prapt jo Sant hai, weaknesses karmon se sansar mein bande bandhiyon ko chhudate Hain.

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संतों की जीवनचर्या संसार के लिए आइने के समान होती है।

Santon ki jivancharya sansar ke liye aaine ke saman hoti hai.

सब भूतों में समदृष्टि से एक हरि को ही देखना चाहिए।

Sab bhuton mein samd Drishti se ek Hari ko dekh hi dekhna chahie.

जो निर्द्वन्द्व होकर निन्दा सह लेता है, उसकी माता धन्य है।

Jo nirdvand ninda sah leta hai, uski Mata Dhanya hai.

ईश्वर का प्रकाश सबके हृदय में समान होने पर भी वह साधुओं के हृदय में अधिक प्रकाशित होता है।

Ishwar ka Prakash sabki hriday me saman hone per bhi varsad Mukesh de mein adhik prakashit hota hai.

समाधि अवस्था में मन को उतना ही आनन्द मिलता है, जितना जीती मछली को तालाब में छोड़ देने से ।

Samadhi avastha mein man ko utna hi Anand milta hai, jitna jiti machhali ko talab mein chhod Dene se.

ज्ञान पुरुष है, भक्ति स्त्री है। पुरुष मायानगरी से तभी छूट सकता है, जब वह परम वैरागी हो। किन्तु भक्ति से तो माया सहज ही छूटी हुई है।

Gyan purush hai, bhakti stri hai. Purush mahanagari se tabhi chhut sakta hai, jab vah Param vairagi Ho. kintu bhakti se to Maya sahaj chhuti Hui hai.

काजल की कोठरी में कितना भी बचकर रहो, कुछ-न-कुछ कालिख लगेगी ही। इसी प्रकार युवक-युवती परस्पर बहुत सावधानी के साथ रहें, तो भी कुछ ना कुछ काम जागेगा ही।

Kajal ki kothri mein Kitna bhi Bach kar raho, kuchh Na kuchh kalik lagegi hi. Isi prakar yuvak-yuvti persper bahut savdhani se sath rahe, to bhi kuchh Na kuchh kam jagah hi.

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