राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) का गौरवशाली इतिहास

राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) का गौरवशाली इतिहास
राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) का गौरवशाली इतिहास
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1 राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) का इतिहास history
1.1 राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) का अकेलगढ़ किला (दुर्ग)

राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) का इतिहास history

अगर वीर राजाओं की बात की जाए तो हमारे देश के इतिहास में बहुत से राजाओं का नाम लिया जाता है जो भारत के सभी राजाओं में सबसे शक्तिशाली हुआ करते थे और दुश्मनों कभी भी उन पर सामने से वार नहीं कर सकते थें, क्योंकि उन्हें पता था कि सामने से हम किसी भी हाल में जीत नहीं सकते। राजस्थान के राजाओं की जब भी बात आती है तो उनमें राजा कोटिया भील का नाम भी लिया जाता है। हमारे बीच में बहुत से ऐसे लोग होंगे जिन्होंने राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) का नाम आज से पहले नहीं सुना होगा।

आप सभी को जानकर हैरानी होगी कि राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) वह शख्स थे जो युद्ध के दौरान अपनी गर्दन कट जाने के पश्चात भी दुश्मनों से लड़ते रहे थे और इन्होंने गर्दन कट जाने के पश्चात भी बहुत से दुश्मनों को मौत के घाट उतार दिया। राजा कोटिया भील राजस्थान में स्थित कोटा के राजा थे जो बहुत ही शक्तिशाली और बुद्धिमान थे और इन्हीं के नाम पर कोटा का नाम रखा गया।

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               राजा कोटिया भील को रघुवा भील के नाम से भी जाना जाता है। राजा कोटिया भील का नाम सबसे प्राचीन राजाओं में लिया जाता है क्योंकि इन्होंने सन 1264 ईस्वी तक राज किया है। बूंदी रियासत को कोटिया भील ने घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। इनके शत्रुओं के लिए इन्हें सामने से हराना बहुत ही मुश्किल था इसीलिए राजा कोटिया भील के शत्रु कुछ ना कुछ षड्यंत्र रचते रहते थे ताकि इनकी हत्या की जा सके।

 

राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) का अकेलगढ़ किला (दुर्ग)

राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) का इतिहास history
राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) का इतिहास history

राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) का प्रमुख स्थान अकेलगढ़ का किला ही रहा हैं। जो उनके राज्य की राजधानी रहा। अकेलगढ़ का किला एक बहुत ही अलग तरह का किला है जो कि अपनी सुंदरता के नाम से भी बहुत मशहूर हैं यह किला चंबल नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित है जो कि राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) की वीरता और पराक्रम को दर्शाता हैं।

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               इस किले की बहुत सी विशेषताएं हैं जिनमें सबसे प्रमुख विशेषता यह है की किसी भी शत्रु को यह किला दूर से नजर नहीं आता और जब कोई भी इसके पास पहुंचता है तो यह किला तुरंत ही नजर आने लगता है। यह किला 3 तरफ से तो 70 फीट ऊंची दीवारों से सुरक्षित है और एक तरफ से बहती हुई चंबल नदी की वजह से यह सुरक्षित हैं। इसके एक तरफ बहती हुई चंबल नदी इस किले की सुंदरता काफी ज्यादा बढ़ा देती है।

राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) के द्वारा शिव लिंग की स्थापना।

कोटा के नीलकंठ महादेव मंदिर के शिवलिंग की स्थापना राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) ने की थी। जो शिव मंदिर विश्व विख्यात है।

 

राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) का सिर धड़ से अलग हो जाने पर भी लगातार शत्रुओं से लड़ते रहे।

 

यह बात तो हमने आपको पहले राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) बहुत ही शक्तिशाली और बुद्धिमान थे इसलिए उन्हें सामने से हराना तो बहुत ही मुश्किल था। इसीलिए एक बार जैत सिंह ने राजा कोटिया भील को अपने महल में दावत पर बुलाया और दावत के दौरान उन्होंने राजा कोटिया भील को बहुत अधिक शराब पिलाई, जिसकी वजह से वें नशे में चूर हो गए। जब राजा कोटिया भील को काफी अधिक नशा हो गया, तो उस समय सालार गाजी तथा हाडा राजपूतों ने मिलकर राजा कोटिया भील पर हमला बोल दिया।

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                राजा कोटिया भील बहुत ही पराक्रमी तथा शक्तिशाली शासक थे इसीलिए उन्होंने नशे की हालत में भी जमकर सालार गाजी तथा हाडा राजपूतों का सामना किया। युद्ध के दौरान उन्होंने अकेले ही सालार गाजी के साथ-साथ दूसरे कुछ दुश्मनों को भी मार गिराया। राजा कोटिया भील की परिस्थिति लड़ने लायक ना होने पर भी वह लड़ रहे थे ये बात जैत सिंह को भी पता थी इसीलिए उसने धोखे से राजा कोटिया भील की गर्दन काट दी। गर्दन कट जाने के पश्चात भी राजा कोटिया भील बिल्कुल ऐसे ही दुश्मनों से लड़ते रहे जैसे कि वह पहले लड़ रहे थे।

इस बात को देखकर जैत सिंह को काफी हैरानी हुई और आखिरकार जैत सिंह और उसके साथियों के द्वारा राजा कोटिया भील को कमर के नीचे तलवारों से वार कर काट दिया और इस प्रकार राजा कोटिया भील लड़ते हुए तीन हिस्सों में बट गए और उनकी हत्या हो गई। ठीक उसी प्रकार उनकी मूर्ति राजा कोटिया भील की मुर्ति तीन हिस्सों में है। लेकिन आज भी लोग उनकी पूजा करते हैं, क्योंकि इतिहास में ऐसा किसी भी राजा के साथ नहीं हुआ कि उसकी गर्दन कट जाने के पश्चात भी वह अपने दुश्मनों के साथ निरंतर लड़ता रहा।

 

राजा जैतसिंह (Raja Jait Singh) ने राजा कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) के सम्मान में कोटा के किले की नींव रखी

 

जब राजा कोटिया भील की हत्या कर दी गई तो उसके पश्चात जैत सिंह के द्वारा कोटा के किले की नींव रखी रखी गई और फिर कोटा का नाम राजा कोटिया भील के नाम पर ही रखा गया। हम आपको बता दें कि कोटा के किले के बाहर महल के प्रमुख द्वार पर राजा कोटिया भील का स्थान भी बना हुआ है और उनकी प्रतिमा लगी हुई है जिसकी आज भी लोग दिल से पूजा करते हैं।

कोटिया भील (Raja Kotiya Bheel) FAQ

राजा कोटिया भील "भील" जाति के थे।

राजा कोटिया भील को रघुवा भील के नाम से जाना जाता है।

राजा कोटिया भील के माता-पिता का इतिहास में उल्लेख कहीं नहीं मिलता।

राजा कोटिया भील के राज्य की राजधानी का नाम अकेलगढ़ था।

राजा कोटिया भील को धोखे से मारा गया।

राजा कोटिया भील की हत्या 1264 में की गई।

राजा कोटिया भील के जन्म तारीख का इतिहास में उल्लेख नहीं मिलता।

राजा कोटिया भील की हत्या जैतसिंह और उनके आदमियों ने की।

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